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लोगों से डील ( Business) करने के तरीके…!! Business 

लोगों से डील ( Business) करने के तरीके…!!

लोगों से डील ( Business) करने के तरीके

अक्सर होता यूँ है की जब भी आप लोगों की बात करते है तो सबकी विचार धाराये अलग अलग होती है। इसलिए जब भी बिज़नस की बात की जाती है तब हमे इस बात का ख्याल रखना चाहिये की बिज़नस आपके हाँथ में होना चाहिये। लोगों से डील करने के तरीके पर ध्यान देते है।

सबसे आसन तरीका कभी किसी की आलोचना न करें, किसी की बुराई न करें और न ही किसी की शिकायत करनी चाहिये

जब भी आपसे पुछा जाये तो आप अपना नजरिया स्पष्ट और ईमानदारी से बताये। अगर आपको लगता है की कोई चीज़ नहीं होनी चाहिये तो उस समय किसी से झगडे नहीं बल्कि अपना पक्ष रखते हुए उन्हें सोचने पर जोर दे। क्यूंकि यह भी हो सकता है की आप अपना पक्ष रखते समय कुछ भूल गए हो, और आपका पक्ष कमजोर भी हो सकता है।

दूसरों की बातों में आप इंटरेस्ट ले क्यूंकि हो सकता है की वो आपके बिज़नस डेवलपमेंट का एक हिस्सा बन सकें।

दूसरों से नेटवर्किंग करते रहें क्यूंकि यह बिज़नस का बहुत जरुरी हिस्सा है। लोगो से मिलते रहे, ड्रिंक्स डिनर आदि पर लोगों को बुलाये और निरंतर नेटवर्किंग करते रहें।

लोगों के साथ कुछ ऐसे विषय जो आप दोनों के बीच सामान्य हो मसलन आप लोगों के पसंद न पसनद, फिल्मे, म्यूजिक, गेम्स। आदि इससे आपको एक दुसरे को समझने का मौका मिलता है।

लोगों का बर्थडे और सालगिरह याद रखें और उन्हें बधाई सन्देश भेजे।

जब भी आप बात करें तो ऐसी बात करें की लोगों को उसमे इंटरेस्ट आये वो उन बातों का हिस्सा बन सकें। अधिकांश समय हम अपने बारे में बात करते है जिसमे लोगों को कम रूचि लेते है।

दुसरे लोगों को एहमियत देना चाहिये, और यह काम पूरी निष्ठां से करनी चाहिये

 

 

हमारा स्वभाव हमें मालूम है परन्तु सामने वाले का स्वभाव कैसे मालूम करें-
पहनावे और दिखावे से : हो सकता है कि लुक से कुछ interpret कर लिया जाए परन्तु यह तरीका एकदम सटीक नहीं होगा ।

बातचीत से : कुछ हद तक ये तरीका कारगर है लेकिन बातें बनाने वाला इंसान हमें बेवकूफ भी बना सकता है ।

किसी से पूछकर : लोग सही जानकारी भी दे सकते हैं और गलत भी ।

स्वयं से : बिल्कुल नहीं । खुद से ही किसी के बारे में पूर्वधारणा बना लेना गलत है । हम भगवान नहीं हैं,अंतर्यामी तो बिल्कुल भी नहीं ।

> अनुभव से : कहते हैं , बाहर से इंसान कुछ भी बोले लेकिन आँखे सब सही बता देती हैं ये बात भगवान जानें लेकिन एक कहावत और भी है – खाट पर और पाट पर * यानि खाते समय व सोते समय व्यक्ति के सब गुण प्रकट हो जाते हैं । यह भी अंदाजा लगाने के लिए पर्याप्त है ।

आचरण से : व्यक्ति का आचरण सब कह देता है । उसके बोलने की आवश्यकता नहीं रहती । इसलिए किसी को कुछ समझाना हो तो उसे उपदेश देने से अच्छा , वह बात अपने आचरण में लाइए ।

अतः किसी का स्वभाव या चरित्र केवल उसके आचरण व कर्मों से ही आंका जा सकता है ।

अंततः यही समझा जा सकता है कि एक अच्छी सामाजिक छवि के लिए जरूरी है सभी के साथ सही व्यवहार करना और सही व्यवहार अर्थात् किसी व्यक्ति विशेष के साथ जैसा उचित हो वैसा व्यवहार करना । तथा उचित व्यवहार के लिए जरूरी है उस व्यक्ति का मूल स्वभाव पता होना , उसे जानना ।

ध्यान रखिए , हम भले ये समझते हैं कि हम इसको अच्छे से समझते हैं , उसको अच्छे से जानते हैं परन्तु ऐसा नहीं है । एक-दूसरे के विषय में गलत धारणा बना लेने के कारण आपसी मनमुटाव जन्म लेते हैं । किसी के एकाध व्यवहार से हम उसकी पूरी तस्वीर बना लेते हैं लेकिन फिर बाद में मालूम चलता है कि इसके बारे में हमने कितना गलत समझा था ।
हितोपदेश की कथाओं में आता है – कोई व्यक्ति अपना मूल स्वभाव कभी नहीं छोड़ता , यदि एक मनुष्य दुष्ट है तो वह हमेशा दुष्टता ही दिखाएगा , चाहे वह वाणी से कितना भी मधुर बोले । फिर भी , चमत्कार की दुनिया में हम आशा रखते हैं कि यदि कोई चाहे तो अपना मूल स्वभाव भी बदल सकता है ।

लेकिन , यदि हमें किसी का मूल स्वभाव नहीं मालूम हो तो उसके प्रत्यक्ष व्यवहार के अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए ।

क्योंकि , जो दिखता है – वो बिकता है । इस तर्ज पर तो जो जैसा व्यवहार हमसे करेगा , वैसा ही व्यवहार हम उससे करेंगे ।
फिर भी , हमारी कोशिश यही रहनी चाहिए कि सबके साथ , जिससे भी हम मिलें हमारा व्यवहार अच्छा और हो सके तो सकारात्मक प्रभाव वाला हो । लोग हमारे व्यवहार से प्रेरणा पाएँ और हमारा बर्ताव उनके मन में एक अमिट छाप छोड़ सकें ।
धर्मग्रंथों में कहा गया है कि हमारे द्वारा किसी का तिरस्कार न हो और न ही किसी को कठोर शब्द बोलें जाएँ , न किसीको दुख पहुँचे । लेकिन आजकल इस ‘ego’ के कारण हम एक-दूसरे को बस नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं । हम विनम्रता की मूर्ति नहीं बन सकते पर थोड़ा नर्म व्यवहार तो अपना ही सकते हैं ।

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