You are here
GST के नाम पर हो रही धोखाधड़ी, देख लें आपके शॉपिंग बिल में जरूर हों ये चीजें… Lifestyle 

GST के नाम पर हो रही धोखाधड़ी, देख लें आपके शॉपिंग बिल में जरूर हों ये चीजें…

 

देशभर में GST लागू हो चुका है. सभी कंपनियां, रेस्‍टोरेंट, होटल और फर्म अपने सिस्‍टम्‍स को भी जीएसटी के अनुसार अपडेट कर रहे हैं. लेकिन यहां ग्राहकों के लिए भी ध्‍यान देने की जरूरत है. ताकि वे जीएसटी के नाम पर किसी भी चालाकी या धोखेबाजी का शिकार होने से बचें और GST स्‍लैब के अनुसार सही टैक्‍स का भुगतान करें.

ग्राहकों को चाहिए कि वे जब भी रेस्‍टोरेंट, होटल या सामान खरीदने कहीं भी जाएं तो बिल को एक बार जरूर जांच लें. वहीं बिल में लगाई गई GST की दरों को भी जांच लें. सबसे पहले तो ग्राहक को कंपनी की जानकारी करनी आवश्‍यक है जो कि बिल में रहती है.

किसी भी बिल में कंपनी, फर्म या रेस्‍तरां की पूरी जानकारी दर्ज होती है. ऐसे में जरूरी है कि किसी भी धोखेबाजी से बचने के लिए ग्राहक सतर्क हो जाएं.

यहां हम आपको बता रहे हैं कि बिल में क्‍या-क्‍या जानकारियां होनी आवश्‍यक हैं.

 

 

कंपनी का नाम– बिल पर कंपनी का नाम होना चाहिए.

कंपनी का पता और फोन नंबर- बिल पर कंपनी का पता और कोई भी एक कॉन्‍टेक्‍ट नंबर होना जरूरी है.

जीएसटिन नंबर – इसका अर्थ है गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स इंफोर्मेशन नंबर. यह बिल में होना अनिवार्य है.

पैन नंबर – पैन कार्ड का नंबर होना चाहिए. पैन नंबर होने का अर्थ है कि कंपनी की आयकर विभाग में डिटेल्‍स दर्ज हैं. (हालांकि जीएसटिन नंबर है तो पैन नंबर की खास जरूरत नहीं है)

CIN नंबर– यह कॉरपोरेट आईडेंटिफिकेशन नंबर के रूप में बिल पर दर्ज होता है.

टिन नंबर– यह किसी भी कंपनी का टैक्‍स इंर्फोमेशन नंबर होता है. जिसका अर्थ है कि कंपनी टैक्‍स भर रही है. हालांकि अगर जीएसटिन नंबर है तो टिन नंबर की कोई जरूरत नहीं है.

एचएसएन कोड- यह कोड भी बिल पर दर्ज होना चाहिए.

स्‍टेट कोड 29 राज्‍यों के अलग-अलग कोड हैं. ऐसे में सेवा प्रदाता को अपने बिल में स्‍टेट कोड दर्ज होना चाहिए.

भुगतान करें तो याद रखें, वस्‍तु या सेवा के भुगतान में हों सिर्फ ये दो टैक्स

अगर आप कहीं भी बिल भर रहे हैं तो याद रखें कि वस्‍तु और सेवा पर सिर्फ GST ही देना होगा. यह GST भी बिल पर दो हिस्‍सों में दर्ज होना चाहिए. किसी भी वस्‍तु या सेवा पर लगने वाले कर को बिल में इन्‍हीं दो भागों में बांटा जाएगा. जैसे जीएसटी की दरें 5, 12, 18 और 28 फीसदी हैं. ऐसे में इन दोनों में 2.5-2.5, फीसदी, 6-6 फीसदी, 9-9 फीसदी या 14-14 फीसदी ही दर्ज होगा.

सीजीएसटी (CGST)- यह जीएसटी का वह भाग है जो केंद्र सरकार को जाता है.

एसजीएससी (SGST)– यह जीएसटी का वह आधा हिस्‍सा है जो राज्‍य सरकार के खाते में जाता है.

NOTE: अगर आप घरेलू सामान को खरीदने जा रहे हैं तो बिल चुकाने से पहले ध्‍यान दें कि उसमें हर सामान के लिए जीएसटी अलग अलग लगाया गया है या एक साथ. एक साथ जीएसटी लगाना गलत होगा.

Related posts

Leave a Comment